“त्रिफला क्या है? जानिए इसके चौंकाने वाले फायदे, उपयोग और सेवन का सही तरीका”
आयुर्वेद की दुनिया में अगर किसी एक औषधि को सर्वगुण संपन्न कहा जाए, तो वह निसंदेह त्रिफला है। त्रिफला सिर्फ एक दवा नहीं बल्कि सेहत का ऐसा साथी है, जो धीरे-धीरे शरीर को भीतर से मजबूत बनाता है और कई समस्याओं को जड़ से खत्म करने में मदद करता है। यह तीन फलों आंवला, हरण और बहेड़ा का संतुलित मिश्रण है, जो मिलकर शरीर के तीनों दोष वात, पित्त और कफ को संतुलन में रखते हैं। पुराने जमाने में हमारे दादा-दादी इसे रोजाना लेने की सलाह देते थे, ताकि पेट साफ रहे और शरीर बीमारियों से दूर रहे। आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में जब खानपान बिगड़ चुका है, नींद पूरी नहीं होती और तनाव हर समय बना रहता है, तब त्रिफला एक प्राकृतिक सहारा बन सकता है। बहुत से लोग बताते हैं कि जब उन्होंने रोज त्रिफला लेना शुरू किया तो उन्हें दवाइयों पर निर्भरता कम करनी पड़ी। यह पाचन से लेकर इम्यूनिटी तक हर जगह काम करता है और धीरे-धीरे शरीर को डिटॉक्स करता है। यही कारण है कि इसे आयुर्वेद का अमृत कहा गया है और आज भी इसकी अहमियत कम नहीं हुई है।
🔬 त्रिफला पर वैज्ञानिक शोध (Research Reference)
त्रिफला से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक शोध और मेडिकल आर्टिकल आप PMC (National Library of Medicine) की इस आधिकारिक साइट पर पढ़ सकते हैं। यह लिंक त्रिफला के फायदे और प्रभाव को वैज्ञानिक रूप से समझने में मदद करता है।
📄 Read Scientific Researchतीन फलों की ताकत
त्रिफला 3 शक्तिशाली फलों से मिलकर बना है, जिनमें से हर एक का अपना अलग महत्व है। आंवला विटामिन सी से भरपूर होता है और शरीर को ठंडक देता है, खून साफ करता है और इम्युनिटी बढ़ाता है। हरण को आयुर्वेद में “पथ्य” कहा गया है, क्योंकि यह पाचन को सुधरता है और कब्ज जैसी पुरानी समस्याओं को जड़ से खत्म करता है। बहेड़ा फेफड़े, आंखों और गले के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है और यह कफ को बाहर निकलने में मदद करता है। इन तीनों का संतुलित मिश्रण शरीर को डिटॉक्स करता है और धीरे-धीरे जमा हुए जहर को बाहर निकालता है। यही संतुलन त्रिफला को बाकी जड़ी बूटियां से अलग बनाता है। जब कोई व्यक्ति इसे नियमित लेता है तो उसे तीनों फलों का संयुक्त असर महसूस होने लगता है। इसे सही मात्रा में लिया जाए तो यह पूरे शरीर के लिए एक संपूर्ण टॉनिक की तरह काम करता है।
पाचन तंत्र का सच्चा दोस्त
त्रिफला का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा फायदा पाचन तंत्र पर पड़ता है। अगर किसी को कब्ज, गैस, एसिडिटी, अपच या पेट भारी रहने की समस्या रहती है, तो त्रिफला उसके लिए रामबाण साबित हो सकता है। यह आंतों की सफाई करता है और मल त्याग को नियमित बनता है, जिससे पेट हल्का महसूस होता है। रोज रात को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से सुबह पेट बिल्कुल साफ होता है और दिन की शुरुआत फ्रेश महसूस होती है। इससे भूख भी खुलकर लगती है और खाना ठीक से पचता है। जिन लोगों को सालों से कब्ज की दिक्कत है उन्हें धीरे-धीरे राहत मिलने लगती है। बहुत से लोग बताते हैं कि 7 से 10 दिन में ही फर्क दिखने लगता है। यह बिना किसी लत के काम करता है, जो इसे बाकी जुलाब से अलग और सुरक्षित बनता है।
आंतों की सफाई और डिटॉक्स
आज की लाइफ स्टाइल में हम इतना जंक फूड खाते हैं कि हमारी आंतों में धीरे-धीरे गंदगी जमा हो जाती है। यानी गंदगी आगे चलकर मोटापा, स्किन प्रॉब्लम, और इम्यूनिटी की कमजोरी का कारण बनती है। त्रिफला इस गंदगी को धीरे-धीरे बाहर निकलता है और शरीर को अंदर से साफ करता है। यह किसी तेज जुलाब की तरह नहीं बल्कि बहुत सौम्य तरीके से काम करता है। रोजाना लेने से शरीर में हल्कापन महसूस होता है और सुस्ती कम होने लगती है। जिन लोगों को हर समय पेट फुला हुआ लगता है, उन्हें भी इससे काफी राहत मिलती है। यह शरीर के नेचुरल क्लीनिंग सिस्टम को एक्टिव कर देता है और अंदर से एक नई ताजगी का एहसास देता है।
वजन घटाने में सहायक
आज के समय में मोटापा एक आम समस्या बन चुका है और लोग महंगे सप्लीमेंट और डाइट प्लान लेने को मजबूर है। त्रिफला एक प्राकृतिक तरीका है जो वजन घटाने में मदद करता है और शरीर को नुकसान भी नहीं पहुंचता। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और शरीर में जमा फैट को तोड़ने में सहायक होता है। जब शरीर डिटॉक्स होता है तो वजन अपने आप काम होने लगता है। त्रिफला भूख को भी कंट्रोल करता है, जिससे बार-बार खाने की आदत कम होती है। बहुत से लोग बताते हैं कि उन्हें जंक फूड की क्रेविंग कम हो जाती है।
अगर सुबह खाली पेट त्रिफला, शहद, और नींबू के साथ लिया जाए, तो असर और भी बेहतर दिखता है। यह स्लो लेकिन सेफ तरीके से वजन घटाने में मदद करता है और शरीर को कमजोर नहीं करता।
डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल में भूमिका
कुछ रिसर्च में पाया गया है कि त्रिफला ब्लड शुगर लेवल को संतुलित करने में मदद कर सकता है। यह इन्सुलिन सेंसटिविटी बढ़ता है और मीठा खाने की क्रेविंग को कम करता है। इसके अलावा यह खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है। जिन लोगों को दिल की बीमारी का डर रहता है, उनके लिए त्रिफला एक सपोर्टिव हर्ब बन सकता है। कई लोग बताते हैं कि नियमित सेवन से उनका कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट बेहतर हुई। हालांकि डायबिटीज या हार्ट पेशेंट को इसे डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए। सही तरीके से लिया जाए तो यह दवाइयां के साथ मिलकर भी काम कर सकता है और शरीर को सपोर्ट दे सकता है।
इम्यूनिटी और ऊर्जा का स्रोत
त्रिफला शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और आपको बार-बार बीमार पड़ने से बचाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं और शरीर को अंदर से जवां बनाए रखते हैं। जो लोग बार-बार सर्दी, खांसी, बुखार या इंफेक्शन से परेशान रहते हैं, उनके लिए त्रिफला बहुत फायदेमंद है। इसे नियमित लेने से शरीर में एक अलग तरह की हल्की-फुल्की ऊर्जा महसूस होती है। थकान कम होती है और काम करने की ताकत बढ़ती है। बहुत से लोग कहते हैं कि सुबह उठते ही शरीर हल्का और फ्रेश लगता है। बदलते मौसम में यह शरीर को बीमारियों से बचाने का काम करता है और इम्यूनिटी शील्ड की तरह काम करता है।
त्वचा के लिए प्राकृतिक सौंदर्य टॉनिक
त्रिफला सिर्फ अंदरूनी सेहत ही नहीं बल्कि बाहरी सुंदरता के लिए भी कमाल का है। यह खून को साफ करता है, जिससे चेहरे पर नेचुरल ग्लो आने लगता है और स्किन फ्रेश दिखती है। मुंहासे, दाग - धब्बे और झुर्रियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। स्किन एलर्जी और खुजली में भी यह राहत देता है। बहुत से लोग बताते हैं कि तीन-चार हफ्ते में स्किन टोन बेहतर दिखने लगता है। अगर त्रिफला पाउडर को गुलाब जल या शहद में मिलाकर फेस पैक बनाया जाए तो त्वचा में नई जान आ जाती है। यह एंटी एजिंग की तरह काम करता है और चेहरे को लंबे समय तक जवां बनाए रखता है।
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बालों के लिए संजीवनी
त्रिफला वालों की जड़ों को मजबूत करता है और हेयर फॉल कम करता है। डेंड्रफ की समस्या में भी त्रिफला काफी असरदार माना जाता है। अगर त्रिफला पाउडर को दही या नारियल तेल में मिलाकर हेयर मास्क बनाया जाए, तो बालों में नई जान आ जाती है। यह समय से पहले सफेद होने से भी बचाता है और बालों को घना बनता है। जो लोग केमिकल प्रोडक्ट्स से परेशान हो चुके हैं, उनके लिए त्रिफला एक नेचुरल विकल्प है। बहुत से लोग बताते हैं कि एक-दो महीने में बालों का झड़ना काफी कम हो जाता है। यह स्कैल्प को साफ करता है और बालों की ग्रोथ को तेज करता है।
आंखों की रोशनी और दृष्टि सुधार
त्रिफला को आयुर्वेद में आंखों के लिए अमृत मान गया है और पुराने समय में वैद्य इसे नियमित रूप से लेने की सलाह देते थे। आज के डिजिटल युग में जब मोबाइल, लैपटॉप, और टीवी स्क्रीन पर घंटों आंखें गड़ी रहती हैं, तब आंखों में जलन, सूखापन और धुंधलापन होना आम बात हो गई है। त्रिफला आंखों की नसों को मजबूत करता है और आंखों में जमा गंदगी को धीरे-धीरे बाहर निकालता है। अगर त्रिफला के पानी से आंखें धोई जाए या इसे नियमित रूप से सेवन किया जाए, तो आंखों की थकान कम होती है और नजर धीरे-धीरे साफ महसूस होने लगती है। बहुत से लोग बताते हैं कि उन्हें रात में साफ दिखने लगा और आंखों की लालिमा भी काम हो गई। यह मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी समस्याओं के खतरे को भी कम कर सकता है। हालांकि इसके लिए लंबे समय तक नियमित सेवन जरूरी होता है। जो लोग चश्मे का नंबर बढ़ने से परेशान रहते हैं, उन्हें भी त्रिफला से कुछ हद तक फायदा महसूस हो सकता है।
लीवर और किडनी की सफाई
लीवर और किडनी हमारे शरीर के सबसे बड़े डिटॉक्स ऑर्गन है, लेकिन गलत खान-पान और शराब, धूम्रपान जैसी आदतों की वजह से इन पर काफी दबाव पड़ता है। त्रिफला इन अंगों की सफाई में बहुत मदद करता है और उनमें जमा टॉक्सिंस को बाहर निकालता है। यह लीवर को मजबूत बनाता है और फैटी लीवर जैसी समस्याओं में भी सहायक माना जाता है। कई लोग बताते हैं कि नियमित सेवन से उनकी रिपोर्ट में GSPT और GSOT जैसे लीवर एंजाइम नॉर्मल होने लगे। किडनी स्टोन के छोटे टुकड़ों को बाहर निकालने में भी यह मददगार हो सकता है। हालांकि गंभीर बीमारी में डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है, लेकिन सामान्य डिटॉक्स और सपोर्ट के लिए त्रिफला एक सुरक्षित विकल्प है। यह शरीर को अंदर से साफ कर हल्कापन और ताजगी का एहसास देता है।
जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत
आजकल कम उम्र में ही घुटनों और जोड़ों में दर्द होना आम हो गया है, जिसका बड़ा कारण गलत लाइफस्टाइल और पोषण की कमी है। त्रिफला में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। जिन लोगों को अर्थराइटिस या गठिया की शिकायत रहती है, उन्हें नियमित सेवन से काफी राहत मिल सकती है। यह जोड़ों में जमा यूरिक एसिड को बाहर निकालने में भी सहायक माना जाता है। बहुत से बुजुर्ग बताते हैं कि जब उन्होंने रोज रात को त्रिफला लेना शुरू किया तो सुबह उठते समय जकड़न कम महसूस होने लगी। धीरे-धीरे चलने फिरने में आसानी होने लगी और दर्द में भी कमी आई। यह हड्डियों को मजबूत करता है और शरीर को अंदर से सपोर्ट देता है।
मानसिक शांति और तनाव में कमी
त्रिफला सिर्फ शरीर के लिए ही नहीं बल्कि दिमाग और मन के लिए भी बहुत फायदेमंद है। यह नर्वस सिस्टम को शांत करता है और तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसे लक्षणों को कम करने में मदद करता है। आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में जब हर कोई किसी ने किसी टेंशन में रहता है, तब त्रिफला एक नेचुरल स्ट्रेस रिलीवर की तरह काम करता है। इसे लेने से नींद भी बेहतर आती है और दिमाग में चलने वाले बेवजह के विचार कम होने लगते हैं। बहुत से लोग बताते हैं कि,उन्हें गुस्सा कम आने लगा और मन ज्यादा शांत महसूस होने लगा। यह हार्मोन बैलेंस में भी मदद करता है और मानसिक थकान को दूर करता है। नियमित सेवन से जीवन में एक अलग तरह की स्थिरता और पॉजिटिविटी महसूस होने लगती है।
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महिलाओं के लिए विशेष लाभ
महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव ज्यादा होते हैं, जिसकी वजह से पीरियड्स की अनियमितता, पेट दर्द, मुंहासे और मूड स्विंग जैसी समस्याएं आम है। त्रिफला इन सभी समस्याओं में सहायक माना जाता है क्योंकि यह हार्मोन बैलेंस को सुधारता है और शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। पीरियड्स के दौरान दर्द और सूजन कम करने में यह मदद करता है। जिन महिलाओं को कब्ज और ब्लोटिंग की शिकायत रहती है, उन्हें भी इससे काफी राहत मिलती है। प्रेगनेंसी के बाद शरीर को फिर से मजबूत बनाने में भी त्रिफला उपयोगी हो सकता है। हालांकि इस दौरान डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है। बहुत सी महिलाएं बताती हैं कि नियमित सेवन से उनका चेहरा साफ रहने लगा और थकान भी कम महसूस होने लगी।
बुजुर्गों और बच्चों के लिए उपयोगिता
त्रिफला बुजुर्गों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि इस उम्र में पाचन कमजोर हो जाता है और जोड़ों में दर्द बढ़ने लगता है। नियमित सेवन से बुजुर्गों को कब्ज से राहत मिलती है और शरीर में हल्कापन महसूस होता है। उनकी इम्यूनिटी भी मजबूत होती है, जिससे वह कम बीमार पड़ते हैं। बच्चों में भी हल्की मात्रा में त्रिफला देने से पाचन सुधरता है और भूख अच्छी लगती है। हालांकि बच्चों को देने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है। यह बच्चों के पेट के कीड़े खत्म करने में भी मददगार माना जाता है। सही मात्रा और सही तरीके से लिया जाए तो यह हर उम्र के लिए फायदेमंद हो सकता है।
सेवन का सही तरीका और समय
त्रिफला का सही तरीका और समय जानना बहुत जरूरी है ताकि इसका पूरा फायदा मिल सके। आमतौर पर इसे रात को सोने से पहले गुनगुने पानी या दूध के साथ लिया जाता है। कुछ लोग सुबह खाली पेट भी लेते हैं, खासकर भजन घटाने के लिए। त्रिफला चूर्ण की मात्रा आम तौर पर आधा से एक चम्मच पर्याप्त होती है। अगर स्वाद कड़वा लगे तो इसमें थोड़ा शहद मिला सकते हैं। शुरुआत में कम मात्रा से शुरू करना बेहतर होता है ताकि शरीर धीरे-धीरे इसके आदी हो सके। नियमित सेवन से ही इसका असर दिखता है, इसलिए इस बीच में छोड़ना नहीं चाहिए। सही तरीके से लिया जाए तो यह बिना किसी साइड इफेक्ट के लंबे समय तक लिया जा सकता है।
संभावित साइड इफेक्ट और सावधानियां
हालांकि त्रिफला एक प्राकृतिक औषधि है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे बिना सोचे समझे लिया जाए। ज्यादा मात्रा में लेने से दस्त, पेट दर्द या कमजोरी महसूस हो सकती है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इसे लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। अगर किसी को एलर्जी की शिकायत हो तो तुरंत सेवन बंद कर देना चाहिए। बच्चों को हमेशा बहुत कम मात्रा में ही देना चाहिए। सही मात्रा और सही समय का ध्यान रखा जाए तो त्रिफला आम तौर पर सुरक्षित माना जाता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी औषधि की तरह इसका भी संतुलित इस्तेमाल ही फायदेमंद होता है।
असली और शुद्ध त्रिफला कैसे पहचाने
आजकल बाजार में मिलावट वाला त्रिफला भी मिल जाता है, जिससे फायदा होने की जगह नुकसान हो सकता है। असली त्रिफला हल्के भूरे रंग का होता है और उसकी खुशबू थोड़ी खट्टी कसैली होती है। इसमें नमी या फंगस नहीं होना चाहिए हमेशा किसी भरोसेमंद ब्रांड या आयुर्वेदिक स्टोर से ही त्रिफला खरीदें। पैकेट पर एक्सपायरी डेट जरूर देखें। घर पर बनाना चाहे तो सूखे आंवला, हरड़ और बहेड़ा को पीसकर बराबर मात्रा में मिला सकते हैं। शुद्ध त्रिफला ही सही असर दिखाता है, इसलिए इसकी क्वालिटी पर समझौता नहीं करना चाहिए।
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निष्कर्ष और मेरा व्यक्तिगत अनुभव
त्रिफला सच में एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से बदल देती है। यह कोई जादू की गोली नहीं है जो एक दिन में असर दिखा दे, बल्कि यह धैर्य और नियमितता मांगती है। जो लोग इसे दो-तीन महीने तक लगातार लेते हैं, उन्हें इसका असली फायदा समझ में आता है। बहुत से लोग बताते हैं कि उनकी जिंदगी में दवाइयों पर निर्भरता कम हो गई और वह खुद को ज्यादा स्वस्थ महसूस करने लगे। अगर आप भी अपनी सेहत को प्राकृतिक तरीके से सुधारना चाहते हैं, तो त्रिफला एक बेहतरीन शुरुआत हो सकती है। सही मात्रा सही समय और थोड़े धैर्य के साथ यह आपकी सेहत का भरोसेमंद साथी बन सकता है।
Short Summary – संक्षेप में
त्रिफला एक प्राचीन और अत्यंत प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधि है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, कब्ज दूर करने, शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने और इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। इस लेख में आपने विस्तार से जाना कि त्रिफला क्या है, इसके तीन मुख्य घटक कौन-से हैं, इसके प्रमुख फायदे, सेवन करने का सही तरीका, उचित मात्रा और किन परिस्थितियों में सावधानी आवश्यक है। यदि त्रिफला का नियमित और सीमित मात्रा में सही विधि से सेवन किया जाए, तो यह लंबे समय तक संपूर्ण स्वास्थ्य को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. त्रिफला क्या है और इसमें कौन-कौन से फल होते हैं ?
त्रिफला तीन आयुर्वेदिक फलों आंवला, हरड़ और बहेड़ा का मिश्रण है। यह तीनों मिलकर शरीर के वात, पित्त और कफ दोष को संतुलित करते हैं और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं ।
2. त्रिफला रोज लेने से क्या फायदा होता है ?
रोज त्रिफला लेने से पाचन सुधरता है, कब्ज दूर होती है, शरीर डिटॉक्स होता है, इम्युनिटी बढ़ती है, त्वचा साफ होती है और वजन कंट्रोल में मदद मिलती है ।
3. त्रिफला लेने का सही समय क्या है ?
आमतौर पर त्रिफला रात को सोने से पहले गुनगुने पानी या दूध के साथ लेना सबसे अच्छा माना जाता है। वजन घटाने के लिए इसे सुबह खाली पेट भी लिया जा सकता है ।
4. त्रिफला की सही मात्रा कितनी होनी चाहिए ?
बड़ों के लिए आधा से एक चम्मच त्रिफला चूर्ण पर्याप्त होता है। शुरुआत में कम मात्रा से शुरू करना बेहतर होता है ताकि शरीर धीरे-धीरे इसके आदी हो सके ।
5. क्या त्रिफला बच्चों को दिया जा सकता है ?
हां, लेकिन बहुत कम मात्रा में और आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से देना चाहिए यह बच्चों का पाचन सुधारने में मदद कर सकता है।
6. क्या डायबिटीज के मरीज त्रिफला ले सकते हैं ?
डायबिटीज के मरीज त्रिफला ले सकते हैं, लेकिन उन्हें इसे नियमित रूप से लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार से चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि, सप्लीमेंट या घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें, विशेष रूप से यदि आप गर्भवती हैं, किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, या नियमित दवाइयां ले रहे हैं। लेखक और प्रकाशित किसी भी प्रकार के नुकसान या दुष्प्रभाव के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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